**नौकरी के झांसे में फंसे युवक**
झुंझुनूं जिले के अक्षय मीणा और शैलेष मीणा ने बताया कि उन्हें थाईलैंड में डेटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी का झांसा देकर म्यांमार के अवैध साइबर कैंप में ले जाया गया। दोनों ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के प्रयासों से दिल्ली लौटने के बाद अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा कि उन्हें जबरन ऑनलाइन ठगी के काम में लगाया गया और इनकार करने पर शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
**साइबर कैंप में बंधक बनाना**
अक्षय ने बताया कि तीन महीने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर उन्हें एक लिंक मिला, जिसमें थाईलैंड में नौकरी का आकर्षक ऑफर दिया गया था। उन्हें बताया गया कि कंपनी वीजा और टिकट की व्यवस्था करेगी। थाईलैंड पहुंचने के बाद, उन्हें एक ऊंची दीवार वाले परिसर में ले जाया गया, जहां अन्य युवाओं को भी बंधक बनाया गया था।
**जबरन ठगी के लिए दवाब**
दोनों युवकों ने कहा कि उन्हें विदेशी नागरिकों से ऑनलाइन ठगी करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। उन्हें प्रति दिन 10 से 15 लाख रुपये की ठगी का लक्ष्य दिया जाता था। लक्ष्यों को पूरा न करने पर उन्हें बिजली के झटके दिए जाते थे या खाने से वंचित रखा जाता था। शैलेष ने कहा, “हमारे सामने कई युवकों को टॉर्चर किया गया।”
**बचने की कोशिश**
लगभग 15 दिन पहले म्यांमार की सेना द्वारा बमबारी के बाद, अक्षय और शैलेष ने भागने का प्रयास किया। उन्होंने दीवार फांदकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में सफलता पाई और एक स्थानीय व्यक्ति की मदद से थाईलैंड पहुंचे। वहां, उन्होंने भारतीय दूतावास में अपनी आपबीती बताई।
**सरकारी सहायता से वापसी**
केंद्र सरकार ने थाईलैंड और म्यांमार प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर 500 भारतीय युवाओं को वापस लाने के लिए एक विशेष विमान का आयोजन किया। अक्षय और शैलेष को दिल्ली से जयपुर साइबर सेल के हवाले किया गया, जहां से उन्हें उनके परिजनों के पास भेजा गया।
**परिवारों की खुशी**
जब अक्षय और शैलेष अपने गांव लौटे, तो उनके परिवार वाले भावुक हो गए। अक्षय की मां ने कहा, “हम रोज भगवान से प्रार्थना करते थे कि वे लौट आएं।” दोनों युवकों ने अब यह निर्णय लिया है कि वे अपने गांव में रहकर दूसरों को इस तरह के झांसे से बचने के लिए जागरूक करेंगे।
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