जयपुर के SMS ट्रॉमा सेंटर में अब केवल ट्रॉमा (दुर्घटना) के मरीजों को प्राथमिकता दी जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने यहां संचालित होने वाली अन्य यूनिट्स को बंद करने पर विचार किया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि ओपीडी से आने वाले मरीजों की भर्ती से ट्रॉमा मरीजों को बेड की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
SMS ट्रॉमा सेंटर, जो उत्तर भारत का सबसे बड़ा ट्रॉमा सेंटर है, में 240 से अधिक बेड और 7 ऑपरेशन थिएटर हैं। यहां विभिन्न शहरों से मरीज रेफर होकर आते हैं, जिसमें जयपुर, भरतपुर और उत्तर प्रदेश के शहर जैसे आगरा और मथुरा शामिल हैं। बढ़ते एक्सीडेंट केसों के कारण यहां मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
अस्पताल के नोडल अधिकारी डॉ. बी.एल. यादव ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में आए एक्सीडेंट केसों को देखकर हम इस स्थिति को लेकर गंभीर हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि प्रिंसिपल-अधीक्षक के साथ चर्चा कर ट्रॉमा सुविधाओं में सुधार करने की योजना है।
अस्पताल की वर्तमान व्यवस्था में ट्रॉमा मरीजों के लिए केवल 50 बेड हैं, जबकि ओपीडी से आने वाले मरीजों के लिए बेड की संख्या अधिक है। ऐसे में, ट्रॉमा सेंटर में सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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