जयपुर के प्रतापनगर क्षेत्र में लोक देवता वीर तेजाजी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना के बाद माहौल गरमा गया है। इस घटना के विरोध में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया और टोंक रोड को जाम कर दिया।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने, तो लाठीचार्ज कर रास्ता खुलवाया। अब इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है, और विभिन्न नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।
हनुमान बेनीवाल ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्वाचन क्षेत्र में तेजाजी महाराज की मूर्ति खंडित करने के बाद जनता का आक्रोश स्वाभाविक था।
उन्होंने आरोप लगाया कि जयपुर पुलिस कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री के इशारे पर कार्रवाई कर रहे हैं।
बेनीवाल ने पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
उन्होंने हिरासत में लिए गए आरएलपी कार्यकर्ताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई की मांग की और कहा कि तेजाजी की आस्था से खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा।
अशोक गहलोत ने भी की निंदा, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी और इसे गंभीर धार्मिक आस्था का उल्लंघन बताया।
उन्होंने कहा कि जनभावनाओं और धार्मिक आस्था के साथ इस तरह का खिलवाड़ अस्वीकार्य है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि मूर्तिभंजन के दोषियों की तत्काल पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
साथ ही, उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सियासी गर्माहट और प्रशासन की चुनौती
इस घटना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
पुलिस प्रशासन पर एक तरफ कानून व्यवस्था बनाए रखने का दबाव है, वहीं दूसरी ओर सियासी हमलों का सामना भी करना पड़ रहा है।
सरकार की अगली कार्रवाई इस विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभाएगी।
अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या दोषियों पर त्वरित कार्रवाई होती है या यह मामला राजनीतिक विवादों में उलझ कर रह जाता है।