Jaipur Foundation Day- जयपुर, जिसे गुलाबी नगरी के नाम से जाना जाता है, आज अपने 297 वर्षों के गौरवशाली इतिहास का उत्सव मना रहा है। 1727 में सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा स्थापित यह शहर न केवल अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके नियोजन, वास्तुकला, और ऐतिहासिक महत्व ने इसे दुनियाभर में विशिष्ट पहचान दिलाई है। जयपुर भारत का पहला व्यवस्थित रूप से नियोजित शहर है, जिसे वास्तु शास्त्र और तंत्र शास्त्र के सिद्धांतों पर बनाया गया था।
गुलाबी शहर का इतिहास और नामकरण
जयपुर को 1878 में प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा के दौरान गुलाबी रंग से रंगा गया। यह मेहमाननवाजी का प्रतीक था, और तभी से यह ‘गुलाबी नगरी’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया। इससे पहले यह क्षेत्र आमेर के कछवाहा राजपूत शासकों के अधीन था। जब सवाई जय सिंह द्वितीय ने राजधानी को आमेर से जयपुर स्थानांतरित किया, तो उन्होंने इसे वास्तु और तंत्र शास्त्र के अनुसार डिज़ाइन करवाया।
शहर का नाम इसके संस्थापक सवाई जय सिंह द्वितीय के नाम पर रखा गया। इसे डिज़ाइन करने में बंगाल के विद्वान वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य ने प्रमुख भूमिका निभाई। जयपुर के नौ ब्लॉक डिज़ाइन में से दो राजकीय भवनों और महलों के लिए थे, जबकि बाकी सात आम जनता के लिए। शहर को चारों ओर से दीवारों और सात मजबूत द्वारों से सुरक्षित रखा गया।
जयपुर का निर्माण और अश्वमेध यज्ञ
जयपुर की स्थापना के दौरान जल महल के पास एक विशाल अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया गया था। यज्ञ की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए बड़े-बड़े पत्थरों के दीपक बनाए गए थे। इसके साथ ही जयपुर को सुरक्षित और योजनाबद्ध बनाने के लिए चार साल की अवधि में शहर के प्रमुख चौराहे, सड़कों और भवनों का निर्माण किया गया।
जयपुर के महल और किले: इतिहास की अद्भुत धरोहरें
जयपुर अपने महलों, किलों और ऐतिहासिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है।
आमेर किला:

राजा मान सिंह द्वारा 967 ई. में निर्मित यह किला, जयपुर का गौरव है। आमेर किले का निर्माण और विस्तार 150 वर्षों तक चला। इसे भव्य और मजबूत बनाने में जय मान सिंह प्रथम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नाहरगढ़ किला:

1734 में सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित इस किले का शाब्दिक अर्थ ‘बाघों का निवास’ है। इंडो-यूरोपीय वास्तुकला से प्रेरित, यह किला मराठों के साथ संधियों और 1857 के विद्रोह के दौरान यूरोपीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए जाना जाता है।
जयगढ़ किला:

1726 में आमेर किले की सुरक्षा के लिए बनाया गया यह किला, जयवाना तोप के लिए प्रसिद्ध है, जो दुनिया की सबसे बड़ी तोपों में से एक है।
जल महल:

सागर झील के बीच स्थित यह महल पांच मंजिला संरचना है, जिसमें केवल ऊपरी मंजिल पानी के ऊपर दिखाई देती है। यह शिकारगाह के रूप में इस्तेमाल होता था और जयपुर के शासकों की दूरदर्शिता का प्रतीक है।
जंतर मंतर: खगोलीय विज्ञान का चमत्कार

सवाई जय सिंह ने 18वीं सदी में खगोलीय विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए जंतर मंतर का निर्माण कराया। इसमें 19 खगोलीय उपकरण हैं, जिनमें से सम्राट यंत्र एक विशाल सूर्य घड़ी है। यह न केवल मौसम की जानकारी देता था, बल्कि ग्रहों की चाल का भी पूर्वानुमान लगाता था।
स्थापना दिवस का उत्सव
जयपुर प्रशासन हर साल स्थापना दिवस को विशेष रूप से मनाता है। इस वर्ष भी शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी, और परंपराओं के प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। दुनिया भर के मेयर भी इस आयोजन में भाग लेने आएंगे।
जयपुर का वैश्विक महत्व
जयपुर के महल, किले, मंदिर और बावड़ियां आज भी वास्तुकला और संस्कृति के अद्भुत उदाहरण हैं। हवा महल, गोविंद देवजी का मंदिर, और गैटोर की छतरियां इसकी सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करते हैं।
जयपुर का इतिहास हमें न केवल इसके गौरवशाली अतीत की याद दिलाता है, बल्कि यह दिखाता है कि किस प्रकार परंपरा और आधुनिकता का संगम संभव है। जयपुर की यात्रा इसकी भव्यता और संस्कृति को करीब से देखने का मौका देती है। यह शहर न केवल राजस्थान, बल्कि भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है।