Waqf संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। पीएम मोदी ने कहा कि यह विधेयक उन लोगों को सशक्त करेगा, जो लंबे समय से हाशिये पर थे और जिनकी आवाजें अब तक अनसुनी रह गई थीं।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि दशकों से वक्फ व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी रही है, जिससे खासकर मुस्लिम महिलाओं, गरीब और पसमांदा मुसलमानों को नुकसान पहुंचा है। नए विधेयक के माध्यम से इन वर्गों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी और उन्हें नई उम्मीद मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि देश अब एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहा है जहां व्यवस्थाएं अधिक आधुनिक होंगी और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार प्रत्येक नागरिक की गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इसी सोच के साथ एक मजबूत, समावेशी और करुणामय भारत का निर्माण संभव होगा।
विधेयक को मिली संसद की मंजूरी
वक्फ संशोधन विधेयक को पहले लोकसभा में और फिर राज्यसभा में बहस के बाद पास किया गया। लोकसभा में करीब 12 घंटे की चर्चा के बाद 2 अप्रैल की रात विधेयक को बहुमत से पारित कर दिया गया, जहां इसके पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े। इसके बाद 3 अप्रैल को राज्यसभा में भी इस पर 13 घंटे लंबी बहस हुई। यहां विधेयक के पक्ष में 128 और विरोध में 95 सांसदों ने वोट डाले।
राज्यसभा ने मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 को भी पारित कर दिया। दोनों सदनों से पास होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी के बाद इसे अधिसूचित कर कानून का रूप दिया जाएगा।
इस विधेयक के तहत वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने, भ्रष्टाचार रोकने और समाज के वंचित वर्गों तक न्याय पहुंचाने की दिशा में कई अहम बदलाव किए गए हैं।