तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के गाचीबोवली वन क्षेत्र में पेड़ों की कथित कटाई को लेकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने कड़ा रुख अपनाया है। यह मामला हैदराबाद विश्वविद्यालय परिसर के पास कांचा गाचीबोवली के 400 एकड़ क्षेत्र में पेड़ गिराए जाने से जुड़ा है। इस मुद्दे पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने तेलंगाना सरकार से रिपोर्ट तलब की है।
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने संसद में जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को नोटिस भेजकर पूछा है कि आखिर हरित क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को क्यों काटा गया। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और सवाल उठाया कि राज्य सरकार ने रात के अंधेरे में इस तरह की कार्रवाई क्यों की। मंत्री ने यह भी कहा कि मोर जैसी वन्य प्रजातियों को इस वजह से जंगल से खदेड़ दिया गया है।
इस गंभीर मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख दिखाया है। अदालत ने तेलंगाना सरकार की ओर से किसी भी निर्माण कार्य या गतिविधि पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि यह एक बेहद गंभीर मामला है और तेलंगाना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट में भी चिंता जताई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को तय की है।
गाचीबोवली में पेड़ों की कटाई को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के सांसद रविचंद्र वड्डीराजू ने इस मुद्दे को संसद में उठाते हुए पूछा कि पेड़ों की कटाई के बीच केंद्र सरकार हरित क्षेत्र की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रही है। इस पूरे विवाद ने राज्य और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है, साथ ही यह मामला पर्यावरण संरक्षण के सवालों को भी केंद्र में ले आया है।