जयपुर में पुलिस ने एक नकली नोट छापने वाले गिरोह का खुलासा किया है, जिसमें छह सदस्य शामिल हैं। इस गिरोह का मास्टरमाइंड मनोज बिश्नोई है, जो पहले मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाता था। पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्यों में से कुछ ने 10वीं और 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है।
गिरोह के सदस्यों ने पिछले एक साल में करोड़ों रुपये के नकली नोट बाजार में वितरित किए हैं। पुलिस ने 43.24 लाख रुपये के नकली नोट जब्त किए हैं। इस गिरोह ने ग्राहकों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे इंस्टाग्राम, के माध्यम से आकर्षित किया और असली नोटों के बदले नकली नोटों का सौदा किया।
पुलिस ने 17 अक्टूबर को जयपुर के नारायण विहार स्थित एक फ्लैट पर छापेमारी की, जहां राजेंद्र चौधरी और शंकरलाल चौधरी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद, 18 अक्टूबर को बीकानेर से अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि गिरोह ने यूट्यूब पर वीडियो देखकर नकली नोट बनाने के तरीके सीखे थे।
गिरोह के सदस्यों ने एक-दूसरे के साथ संबंध बनाकर अपने नेटवर्क का विस्तार किया। मनोज ने अपने यूट्यूब चैनल पर नकली नोट बनाने के तरीके के वीडियो अपलोड किए थे, जिससे अन्य लोग उसे संपर्क करने लगे। गिरोह में शामिल होने के बाद, सदस्यों को विभिन्न भूमिकाएं दी गईं, जैसे नोट छापना, पैक करना और वितरण करना।
पुलिस ने बताया कि ये आरोपी केवल 500 रुपये के नकली नोट बनाते थे। गिरोह ने नकली नोटों की गुणवत्ता में सुधार के लिए कई प्रयोग किए थे। जयपुर के गांधी नगर थाने में आरबीआई द्वारा नकली नोटों से जुड़े 11 मामले दर्ज किए गए हैं।
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